*वाराणसी/-महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के द्वितीय परिसर महाराजा (डॉ0) विभूति नारायण सिंह गंगापुर परिसर वाराणसी में एक राष्ट्र एक चुनाव: प्रस्ताव और चुनौतियाँ विषय पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन।मुख्य अतिथि प्रोफेसर हरिकेश बहादुर सिंह,पूर्व कुलपति,जय प्रकाश सिंह विश्विद्यालय,छपरा बिहार।मुख्य वक्ता प्रोफेसर टीपी सिंह निदेशक पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ काशी हिंदू विश्वविद्यालय,वाराणसी।विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर बंशीधर पांडेय प्रोफेसर समाजकार्य विभाग,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी।विशिष्ट अतिथि डॉ राहुल गुप्ता उपाचार्य समाजशास्त्र विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,वाराणसी।परिसर प्रभारी डॉ मनीष कुमार सिंह,संगोष्ठी संयोजक डॉ अविनाश कुमार सिंह,सह संयोजक डॉ राम प्रकाश सिंह यादव,सचिव डॉ पुरुषोत्तम लाल विजय,डॉ सर्वेश कुमार मिश्रा आदि ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन किया।स्वागत उपरांत कार्यक्रम के आरम्भ में अतिथियों ने प्रतिभागियों से संबंधित रिसर्च पेपरों की दो संकलित पुस्तकों एवं एक रिसर्च जर्नल विमोचन किया,इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के बतौर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो हरिकेश बहादुर सिंह अपने वक्तव्य में अत्यंत संक्षेप में किंतु सारगर्भित बात रखी उहोंने एक राष्ट्र एक चुनाव पर सकारात्मक एवं नकारात्मक बातें बिंदुवार रखा।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर आनन्द कुमार त्यागी जी ने विश्विद्यालय एवं शिक्षण संस्थानों में ऐसे मुद्दों पर चर्चा जरूर होते रहना चाहिए,एक राष्ट्र एक चुनाव से होने वाले सकारात्मक पहलू पर बात रखी।मुख्य वक्ता प्रोफेसर टी पी सिंह ने पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति की चर्चा की और साथ ही उन्होंने परेटो के अभिजात परिभ्रमण के सिद्धांत की चर्चा करते हुए इलिट वर्ग की चर्चा की और बताने का प्रयास किया कि सत्ता कुछ गिने चुने लोगों के हाथों में घूमती है ये चक्र समाज में चलता रहता है।प्रो बंशीधर पाण्डेय ने सरकार दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए चुनाव में होने वाले बड़े खर्च चिंता का विषय है,जरूरी सुरक्षा आदि पर खर्च देखे जाएं तो एक राष्ट्र एक चुनाव एक उपयोगी प्रयास होगा।परिसर के प्रभारी डॉ मनीष कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।डॉ अविनाश कुमार सिंह ने अतिथियों का वाचिक स्वागत डॉ राम प्रकाश सिंह यादव ने स्वागत भाषण किया तथा संचालन डॉ अर्चना कुमारी ने किया।इस अवसर पर देश के विभिन्न स्थानों से लगभग 150 विद्वानों/विद्यार्थियों/अधिकारियों ने भाग लिया।*
