*खंडहर में बदलता आस्था का प्रतीक:जद्दूपुर का राम मंदिर*
*उपेंद्र उपाध्याय*
*वाराणसी/-जनपद के ब्लाक आराजी लाइन के ग्राम सभा गुरुदास पुर राजस्व गांव जद्दूपुर में स्थित भगवान श्रीराम जानकी की यह प्राचीन मंदिर आज अपनी उपेक्षा की कहानी खुद बयाँ कर रहा है।तस्वीरों में टूटी दीवारें,झाड़ियों से ढकी छत और भीतर खंडित मूर्तियाँ केवल पत्थरों और ईंटों का ढेर नहीं हैं,बल्कि यह हमारी आस्था,संस्कृति और परंपरा की करुण पुकार हैं।कभी यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ होती होगी,दीपक जलते होंगे,घंटियों की ध्वनि गूँजती होगी और राम नाम के जयकारे से वातावरण पवित्र हो उठता होगा। परंतु आज यहाँ पसरा सन्नाटा और टूटे शिलाखंड देखकर लगता है जैसे आस्था को ही जमींदोज़ कर दिया गया हो।इस मंदिर की हालत देखकर मन में एक पीड़ा उठती है कि जिस धरोहर ने पीढ़ियों तक गाँव को पहचान दी,उसे ही अब भुला दिया गया है।मंदिर की टूटी मूर्तियाँ मानो पूछ रही हों “क्या हमें यूँ ही मिट जाने के लिए छोड़ दिया जाएगा।यह केवल एक इमारत का खंडहर होना नहीं है,बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों का हिलना है।अगर समय रहते इसे संभाला नहीं गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ सिर्फ तस्वीरों और कहानियों में ही इस मंदिर को जान पाएँगी।आज आवश्यकता है कि प्रशासन,समाज और ग्रामवासी मिलकर इस धरोहर को बचाने के लिए आगे आएँ ताकि यह प्राचीन राम मंदिर फिर से अपनी आस्था और गौरव का केंद्र बन सके।*
