*सामाजिक कार्य के प्रखर समाजसेवक सबको अपना बनाकर सबके बन सदियों याद किये जाते हैं*

*उपेंद्र उपाध्याय*

*वाराणसी/-जनकवि धूमिल के गांव खेवली में एक ऐसे महापुरुष जो समाजसेवा में पूरा जीवन समर्पित कर सबके दिलों में बस गए।वैसे खेवली गांव में कई महापुरुषों का जन्म स्थली होने के कारण विश्व स्तर पर याद किये जाते हैं।खेवली के उपखण्ड आबादी चकरा के 72 वर्षीय फेकू राम पटेल जो अपना पूरा जीवन समाज सेवा में समर्पित कर गोलोकधाम को चले गए।फेकू राम पटेल को समाजसेवा का जूनून बचपन से था।भतसार गांव में स्थित ब्रिटिश सरकार की स्कूल बंद होने पर पढ़ाई बंद हो गई।आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण गांव से दूर पैदल जाकर पांच रुपए महीने पर बनारसी साड़ी कढ़ाने व बुनने का सिलसिला शुरू किया।देखी देखा गांव के कई लोगो को जोड़ लिया।धीरे धीरे लोगों को मिलाकर गांव में ही रोजगार शुरू किया और पचासों बनारसी साड़ी की मशीन लगाकर घर पर हाथ से साड़ी बुनने काम शुरू किया।वर्ष 1980 मे़ गांव में चंदा लगाकर लगभग चालीस गाड़ी ईट से जन सहयोग से चार सौ मीटर आने जाने के लिए खड़ंजा लगाया। गांव में एक बिरहा टीम बनाया मिले पुरस्कार के रूप में आए पैसों और गांव के चंदों से धीरे-धीरे एक-एक कर हंडा,कड़ाही,थार,परात,दरी,टाट,पौना,पौनी,कलछुल,बाल्टी व भोजन बनाने के सामान सहित टेंट के सभी सामान कुर्सी,मेज,चारपाई,परदा व अन्य सामान इकठ्ठा किया।सामान को रखने के लिए ‘एक समाज घर’ का निर्माण कराया।अब गांव में एक साथ दो बारात आ जाएं तो भी लोगों को भोजन बनाने के सामान व टेंट का सामान लेने के लिए किसी को बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ती।गांव का कोई भी व्यक्ति एक छोटा सा धनराधि जमा कर सामान ले जा सकता है।कुशल व्यक्तित्व के धनी जो पंचायती व्यवस्था को जिंदा रखने के लिए बैठक कर गांव के हर एक व्यक्ति को आपस में जोड़कर साथ ले चलते रहे।गांव में कहीं पर भी कोई कार्यक्रम होता उसमें बढ़ चढ़ कर भाग लेकर एक गार्जियन व परिवार के सदस्य की तरह कार्य करते रहे। जिस कार्यक्रम में किसी कारण नहीं पहुंच पाते थे उस कार्यक्रम में लोगों को उनकी कमी खलती थी।वे रोते हुए व्यक्ति को हंसाने वाले अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया।उन्होंने एक भजन मंडली टीम का गठन किया।भजन में उनके साथी रामजी दुकानदार,नंदलाल,छोटेलाल पटेल,उदल,विनोद,गोविन्द,राधेश्याम,रामअलम पटेल आदि लोग मिलकर उनका साथ देते उससे जो पैसा आता उससे एक-एक गांववालों के जरूरत के सामान मंगाते रहे।उनका देहांत 27 सितंबर 2025 को हो जाने से पूरा गाँव क्षेत्र दुःखी है।उनके मृत्यु की सूचना पर उन्हें देखने के लिए लोगों का ताता लगा रहा।उनके तीन बेटे व दो बेटियां जो सभी शादी शुदा है।उनकी इच्छा रही कि मेरे जाने के बाद भी ‘समाज घर’को सभी मिलकर आपस में मेल मिलाप के साथ सुख-दुःख में बराबर साथ देते रहें,भाई चारे के साथ गांव की मर्यादा को बनाये रखें।उनके गोलोकवासी होने पर पर्यावरण व जल संरक्षण प्रेमी मनीष पटेल को इस कारवां की जिम्मेदारी सौंपकर ग्रामीणों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।सामाजिक कार्य के प्रखर समाजसेवक फेकू राम पटेल सबको अपना बनाकर सबके बन कर अब सदियों याद किये जाते रहेंगे।*

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